PB8LIVE NEWS/पंजाब
Baisakhi 2024: देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ बैसाखी का पर्व मनाया जा रहा है। सिख समुदाय से जुड़े लोगों के लिए बैसाखी का विशेष महत्व है. बता दें कि जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं उसी दिन बैसाखी मनाई जाती है। हर साल 13 या 14 को बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। लेकिन इस बार सूर्य 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं इसलिए आज बैसाखी मनाई जा रही है।
कैसे मनाते हैं बैसाखी का पर्व?
बैसाखी के दिन सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारा सजाते हैं, गुरु वाणी सुनते हैं और अपने-अपने घरों में विशेष पूजा करते हैं. इसके अलावा घर के बाहर लकड़ी का घेरा बना कर चलते हैं और वहां पर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं. साथ ही एक दूसरे के गले मिलकर बैसाखी की शुभकामनाएं देते हैं. इस दिन शरबत और विशेष पकवान बनाने की भी परंपरा है.
बैसाखी पर्व का इतिहास
बैसाखी पर्व की शुरुआत 30 मार्च 1699 से मानी जाती है. इस दिन सिख समुदाय के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. तभी से बैसाखी पर्व मनाया जाता है. गुरु गोविंद सिंह जी ने सिख समुदाय के लोगों से गुरु और भगवान के लिए बलिदान होने के लिए आगे आने के लिए कहा था. जो लोग बलिदान हुए थे, उन्हें पंज प्यारे कहा जाता था. जिसका तात्पर्य है गुरु के पांच प्रियजन.





